मंगलवार, ९ फरवरी २०१०
दोहे और उक्तियाँ !!
भारत और पाकिस्तान को द्विपक्षीय आधार पर मतभेद सुलझाने चाहिए :अमेरिकी रक्षा मंत्री !!
अमेरिका ने पाकिस्तान की इस सोच को गलत बताया है कि भारत-पाक संबंधों में वह भारत का समर्थन करता रहा है। अमेरिकी रक्षामंत्री राबर्ट गेट्स का कहना है कि नई दिल्ली को ऐसे उद्देश्य के लिए अमेरिका की मदद की जरूरत नहीं है। दोनों देशों को द्विपक्षीय आधार पर मतेभद सुलझाने चाहिए।गेट्स ने कहा, ‘जो लोग इतिहास पर नजर रखते हैं, उन्हें पता होगा कि कुछ समय पहले तक भारत के साथ हमारे संबंध अच्छे नहीं थे।’ उन्होंने यह टिप्पणी हाल में पाकिस्तान यात्रा के दौरान पूछे गए सवालों के जवाब में की है।
पेंटागन ने इसका पूरा विवरण जारी किया है। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत-पाकिस्तान के नेताओं से बातचीत के दौरान दोनों देशों ने कहा था कि वे द्विपक्षीय आधार पर अपने विवाद हल करना चाहते हैं। खुली और पारदर्शी बातचीत आपसी गलतफहमियों को खत्म करने का एक रास्ता है।
गेट्स ने कहा कि अफगानिस्तान में भूमिका को लेकर भी दोनों देशों के बीच संदेह हैं। भविष्य में होने वाली किसी भी बातचीत में उन्हें इसे दूर करने की कोशिश करनी चाहिए।
मंगलवार को गडकरी औपचारिक रूप से भाजपा के अध्यक्ष !!
नितिन गडकरी को मंगलवार को औपचारिक रूप से भाजपा का अध्यक्ष चुन लिए जाने के साथ ही एक साल से चल रही पार्टी के संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।पार्टी के संगठनात्मक चुनाव के प्रमुख थावर चंद गहलोत ने बताया कि यहां भाजपा मुख्यालय में भाजपा अध्यक्ष पद के लिए चुनाव की प्रक्रिया सुबह दस बजे शुरू होगी। दस से बारह बजे तक इस पद के लिए नामांकन पत्र भरे जा सकेंगे और दोपहर बारह से साढ़े बारह बजे तक उनकी जांच होगी। इस बीच नामांकन पत्र वापस भी लिए जा सकेंगे। एक बजे तक अध्यक्ष पद के विजयी उम्मीदवार की घोषणा कर दी जाएगी।
भाजपा सूत्रों ने बताया कि यह चुनाव महज औपचारिकता भर होगी, क्योंकि गडकरी के अलावा किसी अन्य के नामांकन पत्र आने की संभावना नहीं है।
पार्टी के विधान के अनुसार गडकरी के कल अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हो जाने के बाद 17 फरवरी से इंदौर में शुरू हो रही राष्ट्रीय परिषद की बैठक में उसका अनुमोदन किया जाएगा।
ग्रामीण, जिला और राज्य स्तर से शुरू होकर भाजपा के संगठनात्मक चुनावी प्रक्रिया का समापन राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्वाचन से होता है।
गुलमर्ग में भीषण हिमस्खलन ,प्रशिक्षण ले रहे सैनिकों की मौत !!
लोकप्रिय स्की रिजोर्ट गुलमर्ग में सोमवार को एक भीषण हिमस्खलन में 17 सैनिकों की मौत हो गई जबकि इतने ही सैनिक उस समय घायल हो गए जब वे तंग चढ़ाइयों पर प्रशिक्षण ले रहे थे।पुलिस और सेना ने कहा कि हिमस्खलन की चपेट में 60 सैनिक उस समय आ गए जब वे शून्य दृश्यता की स्थिति में ऊंची चोटी वाली खिलनमर्ग चोटी की बर्फ पर चढ़ रहे थे। सेना के प्रवक्ता कर्नल जे एस बरार और पुलिस ने कहा कि 17 सैनिक बर्फ में दब गए जबकि 17 अन्य को बर्फ से निकाला गया। 26 लोगों को इस दुर्घटना में बचा लिया गया। कर्नल बरार ने कहा कि सभी घायलों की हालत गंभीर है और उन्हें अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है।
उन्होंने कहा कि मृतकों में एक अधिकारी लेफ्टिनेंट प्रतीक और सेना के प्रतिष्ठित हाई अल्टीटयूड वारफेयर स्कूल के 16 अन्य सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। कर्नल बरार ने बताया कि यह 60 लोग 350 सैनिकों के उस समूह में शामिल थे जिन्हें गुलमर्ग स्थित स्कूल द्वारा संचालित शीतकालीन युद्ध पाठयक्रम के लिए चुना गया था।
गुलमर्ग और इसके आस पास के इलाकों में पिछले दो दिनों से जबरदस्त हिमपात हो रहा है और कुछ इलाकों में छह फुट तक बर्फ के जमने की खबरें मिली हैं। कर्नल बरार ने कहा कि यह समूह सुबह आठ बजे गुलमर्ग से रवाना होकर सर्दी के मौसम के युद्ध प्रशिक्षण शिविर को स्थापित करने के लिए 10000 फुट की ऊंचाई पर खिलनमर्ग की एक पहाड़ी पर पहुंच गया था जहां वह हिमस्खलन की चपेट में आ गया।
राज्य के पर्यटन मंत्री नासिर सोगामी ने कहा कि दुर्भाग्यवश सुबह के समय यह लोग प्रशिक्षण के लिए गए हुए थे और हिमस्खलन की चपेट में आ गए। घायलों में कम से कम 12 लोगों की हालत नाजुक है और उन्हें अस्पताल भेज दिया गया है। हिमस्खलन अध्ययन प्रतिष्ठान ने कल शाम हिमस्खलन होने की चेतावनी जारी की थी और ऊंचाई पर रहने वाले लोगों से बाहर घूमने के लिए मना किया था क्योंकि इलाके में भारी हिमपात होने की आशंका थी।
प्रतिष्ठान ने चेतावनी जारी करते हुए कहा था, अगले 24 घंटों के दौरान ऊंचाई वाले इलाकों में भूस्खलन होने की आशंका है। इन इलाकों में रहने वाले लोगों को चेतावनी दी जाती है कि वे हिमपात के दौरान बाहर नहीं निकलें और हिमस्खलन की आशंका वाले इलाकों में न घूमें। घायलों में कुछ की हालत गंभीर है जिन्हें नयनाभिराम पर्यटन स्थल गुलमर्ग के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
चालू वित्त वर्ष के दौरान आर्थिक विकास दर 7.2 प्रतिशत !!
भारत सरकार ने चालू वित्त वर्ष के दौरान आर्थिक विकास दर 7.2 प्रतिशत रहने की संभावना जताई है । वैश्विक आर्थिक सुस्ती के दौर में पिछले साल विकास दर 6।7 फ़ीसदी रह गई थी ।
केंद्रीय सांख्यकि संगठन यानी सीएसओ ने मंगलवार को विकास दर का ताज़ा आकलन जारी किया है ।
हालाँकि यह अनुमान रिज़र्व बैंक और वित्त मंत्रालय के अनुमान के मुकाबले कम हैं ।
वित्त सचिव अशोक चावला ने कहा है की सरकार ने आर्थिक सर्वेक्षण में भी कुछ ऐसा ही कहा था और बाद में भी वह इसकी उम्मीद रख रहे थे ।
सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में यह बेहतरी उद्योग और सेवा क्षेत्र में दर्ज किए जा रहे अच्छे प्रदर्शन के आधार पर हैं ।
सीएसओ के मुताबिक औद्योगिक विकास दर 8।9 और सेवा क्षेत्र की विकास दर लगभग दस फ़ीसदी रहने की उम्मीद है ।
हालाँकि विकास दर में यह वृद्धि तब हुई है जब सरकार ने वैश्विक सुस्ती से निपटने के लिए प्रोत्साहन पैकेज दिए थे लेकिन इससे सरकारी घाटा बढ़ रहा है।
योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलुवालिया ने भी माना कि 7।2 फ़ीसदी आर्थिक बढ़ोतरी इसी पैकेज का नतीजा है और अब इसे चरणबद्ध तरीके से ख़त्म किया जाना चाहिए ।
लेकिन उद्योग संगठन फिक्की ने कहा है कि रिज़र्व बैंक की बाज़ार में नकदी घटाने की हाल की घोषणा के साथ-साथ आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज का वापस लिया जाना अर्थव्यवस्था और रोज़गार के लिए घातक सिद्ध होगा ।
सोमवार, ८ फरवरी २०१०
मुंबई किसकी , सवाल सामान्य पर जटिल !!
पिछले एक महीने से पूरे देश को एक सवाल परेशान कर रहा है। मुंबई किसकी है? वैसे तो सवाल बहुत ही सामान्य सा लगता है; परंतु इस सामान्य से लगने वाले सवाल का कई लोगों द्वारा दिए जाने वाले जवाबों ने इस सामान्य से सवाल को बहुत बड़ा, जटिल और गंभीर बना दिया है।मुंबई किसकी है? ये खोजने के पहले इस बात को खोजना जरूरी है कि ये सवाल उठा ही क्यों और कैसे?
मुंबई के स्वामित्व को लेकर जब भी सवाल उठते हैं वे कभी भी मुंबई के लिए या, मुंबई जिस प्रदेश की राजधानी है उस महाराष्ट्र के लिए, या मुंबई में रहने वाले मुंबईकर के लिए नहीं होते।
मुंबई के स्वामित्व का सवाल देश के तमाम नेता अपनी-अपनी राजनीति को भुनाने के लिए उठाते हैं।जब उत्तर भारत में मुख्यत: उत्तर प्रदेश या बिहार में चुनावी सरगर्मियां बढ़ती हैं। इन प्रदेशों का राजनीतिक तापमान बढ़ने लगता है तब उसे और गरम करने के लिए मुंबई पर सवाल उठाए जाते हैं। जब महाराष्ट्र में चुनाव होते हैं तो ये तमाम नेता और राजनीतिक पार्टियां मुंबई, मराठी और महाराष्ट्र की अस्मिता के बारे में एक ही स्वर में गाते नजर आते हैं। जितने तीखे लहजे में राहुल गांधी से लेकर आरएसएस और मुकेश अंबानी से लेकर शाहरुख खान तक मुंबई को देश की धरोहर कहते सुने जा रहे हैं वे सब महाराष्ट्र के चुनाव से समय खामोश क्यों हो गए थे।
विडंबना ये है कि इन सभी के पास राजनीतिक दल है, नेता हैं, एक राज्य है जहां चुनाव होना है, सत्ता का सिंहासन है जहां ये सब बैठना चाहते हैं, मतदाता हैं जिन के भरोसे सब सत्ता के सपने संजोए हुए हैं परंतु इन सभी के पास नहीं है तो बिहार के उज्जवल भविष्य का रोडमैप। वहां के मतदाताओं को देने के लिए चुनावी घोषणा पत्र जिसे सही तौर पर कार्यान्वित किया जा सके। ये सभी जानते हैं कि बिहार के इन मतदाताओं ने हर राजनीतिक दल को बिहार की गद्दी सौंपी है। सभी नेता फल-फूल गए परंतु बिहार वैसे ही रहा जैसा था।
जब इन नेताओं के पास नया कुछ देने के लिए नहीं है तो बिहारियों के हमदर्द बनकर बयानबाजी के चाशनी में घोला हुआ एक नफरत का डोज देते हैं। मुंबई किसकी? जैसे ही ये सवाल उठाया जाता है, मुंबई में इस बात पर ठाकरे खानदान आग उगलना शुरू करता है। क्योंकि उनके पास भी इस मुद्दे के सिवा कोई और मुद्दा ही नहीं है। और उनका टारगेट होते हैं वे उत्तर भारतीय जो मुंबई में वैसे ही आए जैसे ठाकरे आए थे। ठाकरे बंधुओं के इस रिएक्शन पर बिहार में राजनीति का मैच खेलने वाले या तमाम नेता ठाकरे खानदान और मराठियों को कोसना शुरू कर बिहार के मतदाताओं की सहानुभूति बटोरना चाहते हैं।
मुंबई को देखा जाए तो इन तमाम बड़बोले नेताओं का न उनके पूर्वजों का मुंबई को मुंबई बनाने में कोई योगदान रहा है। मुंबई में मराठी माणूस की बात करने वाले ठाकरे परिवार को मुंबई में किसी भी मराठी माणूस द्वारा किया कोई काम नजर नहीं आएगा। मुंबई में जो कुछ भी है वो सब मुंबई में सैकड़ों साल पहले आकर बसने वाले पारसियों, मारवाड़ियों और गुजरातियों ने बनाया है।1833 में जब तत्कालीन ब्रिटिश गवर्नर ने मुंबई के तबके ‘कैंप मैदान’ जो आज का ‘आजाद मैदान’ है में घास चरने वाले जानवरों पर ‘ग्रेजिंग फी’ लगाई तब सर जमशेदजी जीजीभाय ने उस जमाने में 20 हजार रुपए देकर वहां मैदान अंग्रेजी हुकूमत से खरीदा और जानवरों के मालिकों को ग्रेजिंग फी से मुक्ति दिलवाई। उस जमाने में उसे ‘चारी मैदान’ कहा जाने लगा। जमशेदजी पारसी थे और जानवर कोली समाज के पाला करते थे जो मुंबई के भूमिपुत्र थे।
शिवसेना जिन 105 शहीदों की बात करती है जो संयुक्त महाराष्ट्र के लिए शहीद हुए या मुंबई को महाराष्ट्र में बनाए रखने के लिए जिन 105 लोगों ने बलिदान दिया उनमें मोहम्मद अली, श्याम लाल जेठानंद, मुनीम जी बलदेव पांडे, सय्याद कसम, मुंशी वजीर अली, दौलत राम माथुर दास, वेदी सिंह जैसे नाम भी देखने को मिलते हैं वे तो मराठी नहीं थे।
मुंबई का इतिहास बताता है कि मुंबई के मुंबईकर सिर्फ मराठी ही नहीं हुआ करते थे और मुंबई की विकास गाथा ‘बोम भाहिया (अच्छा समुद्र) से बांबे’ तक और ‘मुंबा आई’ से ‘मुंबई’ लिखने वाले कोली समाज, पुर्तगाल, अंग्रेज, पारसी, मारवाड़ी और गुजराती रहे हैं।
शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना यदि संयुक्त महाराष्ट्र की बात करते हैं तो उन्हें मुंबई छोड़ पूरे महाराष्ट्र में करने लायक बहुत कुछ है। विदर्भ में किसानों की आत्महत्याएं, मराठवाड़ा का पिछड़ापन, नक्सलियों से परेशान गढ़चिरौली, भूमाफियाओं से भयभीत कोंकण ये कुछ ज्वलंत समस्याएं हैं जिसे आम मराठी माणूस वर्षो से जूझ रहा है परंतु इस महाराष्ट्र में पैसे का खेल नहीं है जितना मुंबई में है। तो क्या ये समझें मराठी अस्मिता की आड़ में ये दल सिर्फ मुंबई की बात कर अपनी तिजोरियां भर रहे हैं।
कांग्रेस भी यदि राजनीति से उठ कर इस बात पर सोचे तो मुंबई की चिंता छोड़ बाकि महाराष्ट्र के बारे में कांग्रेस को गौर करना चाहिए। वे लगातार राज्य में और केंद्र में सत्ता में हैं। जो कुछ महाराष्ट्र में और मुंबई में अच्छा या बुरा हो रहा है इसके दायित्व से वे मुंह मोड़ नहीं सकते है।
उद्योगपति, फिल्म कलाकार, गायक, खिलाड़ी, समाजसेवी, टीआरपी की होड़ में इस मसाले को लगातार जिंदा रखने वाले हिंदी, अंग्रेजी और मराठी न्यूज चैनल यदि मुंबई के मसले से दूर रहें तो मुंबई में न कोई उत्तर भारतीय पिटेगा न कोई मराठी उत्तर भारत में।
मुंबई किसकी? : इस झगड़े में कांग्रेस, भाजपा, जद यू, राजद, आरएसएस आदि बिहार में फायदे में हैं तो शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना महारष्ट्र में फायदे में हैं। घाटे में हैं तो मुंबई का आम आदमी। मुंबईकर जो मराठी भी पंजाबी भी उत्तर भारतीय भी पारसी भी गुजराती भी मुसलमान भी हिंदू भी क्रिश्चियन भी है क्योंकि मुंबईकर होने से उसके भारतीय होने पर सवाल उठा रहे हैं। महाराष्ट्र में महा इसलिए जोड़ा गया है कि महाराष्ट्रियों के दिल बड़े ‘महान’ होते हैं न कि वह देश से बड़ा है। और इतिहास की बात करें तो मुंबई पर मगध के सम्राट अशोक का राज था और मगथ वर्तमान के बिहार में है।
440 स्क्वायर किलोमीटर में फैला ये शहर भारत की आर्थिक राजधानी कहा जाता है। महाराष्ट्र राज्य की राजधानी मुंबई वैसे तो सात अलग-अलग समुद्री टापू से बना एक शहर है। ये सात टापू हैं कोलाबा, मझगांव, पुराना वूमेंस द्वीप, वडाला, माहिम, परेल और माटूंगा सियोन। 13वीं सदी में सात टापू वाला ये क्षेत्र मगध के चक्रवर्ती राज सम्राट अशोक के अधीन था। उनके पश्चात कुछ समय के लिए ‘सिलहारा’ वंश के अधीन रहा। राजा भीमदेव जिनके राज्य की राजधानी महिकावती (आज का माहिम और प्रभादेवी) हुआ करता थी। उसी समय इस इलाके में व्यापार की शुरुआत हुई। सन् 1343 में ये पूरा प्रदेश गुजरात के सुल्तान के आधिपत्य में आ गया।
सन् 1505 में एक पुर्तगाली ‘फ्रांसिस अलमीदा’ इस द्वीप पर आया तो उसे यहां की खाड़ी, सूरत की खाड़ी से भी जहाजों के दृष्टिकोण से पसंद आई। उसने इस द्वीप को नया पुर्तगाली नाम दिया ‘बोम भाहिया’ जिसका हिंदी का अनुवाद होगा ‘अच्छी खाड़ी’। सन् 1534 में पुर्तगाली हुकूमत ने इसे गुजरात के सुल्तान से जीत लिया। और यहां से मुंबई के विकास का सफर शुरू हुआ। 128 साल के शासन के बाद सन् 1661 में जब जब पुर्तगाल की राजकुमारी कैथरीन के विवाह इंग्लैंड के राजा चाल्र्स द्वितीय के साथ संपन्न हुआ तो पुर्तगालियों ने इंग्लैंड के राज्य को ये द्वीप दहेज स्वरूप उपहार में दिया।
सन् 1668 में सूरत में व्यापार करने वाली इंग्लैंड की कंपनी ‘इंग्लैंड ईस्ट इंडिया कंपनी’ ने इंग्लैंड के राजा से भाड़े पर लिया। भाड़ा था सालाना 10 पाउंड सोना। और इस द्वीप का नाम ‘बोम भाहिया’ से बांबे हो गया। मुंबई के विकास के आगे सूरत की चमक कम होती गई। गुजरात के कई व्यापारी भी अंग्ररेजों के साथ मुंबई में आ बसे। पुर्तगालियों के समय ही पारसियों ने भी ईरान छोड़ मुंबई की ओर रुख करना शुरू कर दिया था। उनके धर्म जरोस्त्रा पर इस्लाम के लगातार बढ़ते हमलों ने उन्हें ईरान छोड़ने को मजबूर किया। सन् 1640 में दोरबजी नानाभाय पटेल ने मुंबई में प्रवेश किया। वे इस द्वीप पर आने वाले पहले पारसी थे।
पारसियों ने इस द्वीप से व्यापार ही नहीं किया लेकिन कई बार जब मुंबई पर हमले हुए तो वे कोली समाज के लोगों के साथ मिलकर पुर्तगालियों के नेतृत्व में जंग भी लड़े। आज की मुंबई भी देखी जाए तो पूरे शहर में पारसियों द्वारा किया गया योगदान ही सामने आता है।
पारसियों ने जितना भी कमाया वो सब इसी शहर पर न्यौछावर कर दिया। मुंबई में रेल, स्टॉक मार्केट, डाकयार्ड, विश्वविद्यालय, स्कूल, कॉलेज, धर्मशाला, बड़े होटल, क्लब, खेल के मैदान ये सभी पारसियों, गुजरातियों और अंग्ररेजों की देन हैं। पुर्तगालियों ने इस शहर का नामकरण किया। ‘बाम भाहिया’ और किया कुछ विकास, अंग्ररेजों ने इस बंबई कहना शुरू किया और बनाया विश्व का एक प्रमुख शहर। यहां के कुछ भूमिपुत्र कोली इसे मुंबा कहते थे। उन्होंने ये नाम मुंबा देवी से लिया जिसकी आज भी मुंबई में पूजा होती है। और अब इसे संवैधानिक रूप से ‘मुंबई’ कहा जाता है।
दहेज़ ह्त्या के दोषियों को उम्र कैद सिर्फ दुर्लभ मामलों में !!
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि दहेज हत्या के मामलों में दोषी व्यक्तियों को उम्र कैद की सजा सिर्फ दुर्लभ मामलों में ही मिलनी चाहिए। आईपीसी की धारा 304-बी के तहत दोषियों के लिए न्यूनतम सात साल से अधिकतम 10 साल तक की सजा का प्रावधान है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि यह धारा दहेज हत्या की महज धारणा पर आधारित है और इसमें कम से कम सात साल से उम्र कैद तक सजा हो सकती है।इस टिप्पणी के साथ ही जस्टिस पी सतशिवम की अगुवाई वाली बेंच ने दहेज हत्या के मामले में जीवी सिद्धमेश को मिली उम्र कैद की सजा घटाकर 10 साल कर दी। सेशन कोर्ट ने सिद्धमेश को उसकी पत्नी की हत्या का दोषी पाते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई थी।
बेंच ने हेमचंद वि. हरियाणा राज्य मामले में पहले आए फैसले को आधार बनाते हुए कहा कि धारा 304-बी के तहत प्रत्येक मामले में दोषी को उम्र कैद की सजा नहीं सुनाई जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि चूंकि सिद्धमेश युवा था, इसलिए उसे उम्र कैद के बजाय 10 साल कैद की सजा देना ज्यादा उचित था। सिद्धमेश ने निचली अदालत के उम्र कैद के फैसले को चुनौती दी थी जिसकी पुष्टि कर्नाटक हाईकोर्ट ने भी कर दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोर्ट में उपलब्ध कराए गए इलेक्ट्रॉनिक सबूत कागजी दस्तावेजों के मुकाबले ज्यादा सटीक और कठोर होने चाहिए। शीर्ष कोर्ट ने यह बात शिवसेना के लोकसभा प्रत्याशी के चुनाव को चुनौती देने वाली एक याचिका को खारिज करते हुए दिए।
कोर्ट ने कहा कि अगर इस तरह के सबूतों की विश्वसनीयता नहीं जांची गई तो फैसला पूर्वाग्रह से ग्रस्त हो जाएगा। ऐसे में याचिकाकर्ता को अपना आरोप ठीक उसी तरह से साबित करना होगा, जिस तरह से आपराधिक मामलों में आरोप साबित किए जाते हैं। कोर्ट का यह फैसला 2004 के आम चुनाव में महाराष्ट्र की सिन्नार सीट से खड़े शिवसेना प्रत्याशी माणिकराव शिवाजी कोकाटे के पक्ष में आया है, जिसके चुनाव को पराजित उम्मीदवार तुकाराम दिघोले ने चुनौती दी थी।
भारत ने विदेश सचिव स्तर की बातचीत का प्रस्ताव पाकिस्तान को दिया !!
भारत ने पाकिस्तान के साथ विदेश सचिव स्तरीय वार्ता के लिए 18 और 25 फरवरी की तारीख का प्रस्ताव रखा है लेकिन चेतावनी भी दी है कि मुंबई हमलों की यदि पुनरावृत्ति हुई तो यह बहुत बड़ा धक्का होगा।भारत ने इस बात को रेखांकित किया है कि विदेश सचिव स्तर की प्रस्तावित बातचीत का मतलब समग्र वार्ता की बहाली नहीं होगा। वैसे वह बलूचिस्तान समेत पाकिस्तान द्वारा उठाए किसी भी मुद्दे पर विचार-विमर्श के लिए तैयार है, क्योंकि भारत इस स्थिति को परिपक्वता और भरोसे के साथ निबटाना चाहता है।
सीमापार आतंकवाद और घुसपैठ में बीते साल उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है और प्रस्तावित मुलाकात में भारतीय पक्ष इन मुद्दों को केंद्र में रखेगा।
समग्र वार्ता के तहत चार दौर की वार्ता में जम्मू कश्मीर और आतंकवाद समेत आठ मुद्दों पर विचार विमर्श किया गया था। लेकिन नवंबर 2008 में मुंबई हमलों के बाद इस पर विराम लगा दिया गया।
सूत्रों ने आज कहा कि विदेश सचिव स्तर की बातचीत, मुंबई हमलों के बाद बंद बातचीत के रास्ते को खोलने के लिए महज संवाद है, यह समग्र वार्ता नहीं है।
सूत्रों ने कहा कि बातचीत की पेशकश, सीमापार आतंकवाद की चिंताओं के निराकरण के लिए भारत की एक व्यावहारिक पहल है।
गतिरोध खत्म करने का फैसला करते हुए विदेश सचिव निरूपमा राव ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष सलमान बशीर को बातचीत के लिए यहां आने का न्यौता दिया है और 18 एवं 25 फरवरी की तारीख की पेशकश भी की है।
विदेश सचिव स्तर की बातचीत की पेशकश करते हुए भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान जब तक सीमापार आतंकवाद के मुख्य मुद्दे पर नहीं आता, तब तक कोई सार्थक संवाद या रिश्ते सामान्य नहीं हो सकते।
मुंबई हमलों की पुनरावृत्ति रोकने में पाकिस्तान की असमर्थता को खारिज करते हुए सूत्रों ने कहा कि ऐसा कोई हमला दोबारा हुआ तो संबंध सामान्य करने के प्रयासों को बहुत बड़ा धक्का लगेगा।
सूत्रों ने यहां इस बात को रेखांकित किया कि आतंक के माहौल में सार्थक संवाद नहीं हो सकता। सूत्रों ने कहा, मुंबई जैसे किसी हमले के दोहराव को रोकने कि लिए पाकिस्तान को सभी जरूरी कदम उठाने चाहिए।
शनिवार, ६ फरवरी २०१०
मिथिला पुत्र लल्लन प्रसाद ठाकुर जयन्ती पर्व, जन्मदिन और माधव सेवा।
कल मिथिला पुत्र स्व. लल्लन प्रसाद ठाकुर का जन्म दिवस था और इस तिथि समारोह में तब्दील कर सामाजिक सेवा के साथ सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन कर स्व. एल पी. ठाकुर स्मृति न्यास ने ठाकुर जी को सम्पूर्ण श्रधांजलि दी।जैसा की न्यास की अध्यक्ष सुश्री कुसुम ठाकुर ने बताया कल सुबह सुबह कुष्ठ रोगियों के लिए कैम्प का आयोजन किया गया था जिसमें रोगियों के लिए दवाई, इलाज के साथ वस्त्र और भोजन की व्यवस्था की गयी थी।
लल्लन जी इंजिनियर थे मगर बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे, अपने पेशे के अतिरिक्त लेखन और सामाजिक कार्य में सदैव अग्रणी रहते थे, मैथिली भाषा के लिए व्यापक लडाई के अगुआ थे।
मैथिली में विभिन्न नाटकों कविताओ और एकांकी को लिखने वाले लल्लन जी जीवंत पर्यंत अपने सामाजिक कार्यों से जन चेतना का संचार करते रहे।
आज लल्लन जी नहीं हैं मगर उनके पीछे उनका भरा पूरा और समृद्ध परिवार मिथिला की शान है और एल. पी. ठाकुर स्मृति न्यास के माध्यम से उनकी अर्धांग्नी सुश्री कुसुम ठाकुर जनजागृति और सामाजिक कार्यों को सदैवगति देतीं हैं।
कैम्प से वापस आने के बाद कुसुम जी ने अपनी व्यथा फेसबुक पर इस तरह लिखी है कि " ऐसा देश जिसके मात्र एक शहर में, १० लाख की आबादी में कम से कम ६- ७ हज़ार कुष्ठ रोगी हों और सरकार या नेता मात्र चुनाव के समय में वोट मांगने जाएँ और कुछ खाद्य सामग्री दे उनसे वोट तो ले लें, पर जो सरकार की मुफ्त सेवायें हैं उसे भी मुहैया न कराये उस देश को कतिपय प्रगतिशील देश नहीं कह सकते" सरकार, प्रशासन और सम्बंधित विभाग की चिकित्सा के नाम पर ढोलक बजाने वाली भोंपू की हकीकत को उजागर करती है।
आर्यावर्त स्व. लल्लन प्रसाद ठाकूर को श्रधांजलि अर्पित करता है।
शिव सेना अब माई नेम इज खान का विरोध नहीं करेगी !!
पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर शाहरुख़ ख़ान के बयान पर चल रहे विवाद में नया मोड़ आया है । शिवसेना ने अब कहा है कि वह शाहरुख़ की आने वाली फ़िल्म माई नेम इज ख़ान को दिखाए जाने का विरोध नहीं करेगी। लेकिन पार्टी ने शाहरुख़ को 'गद्दार' कहा है ।
शिवसेना के मुखपत्र सामना में लिखे संपादकीय में सेना प्रमुख बाल ठाकरे ने शाहरुख़ के साथ-साथ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और महासचिव राहुल गांधी पर ग़ुस्सा भी निकाला है ।
उन्होंने संपादकीय में लिखा है- इटालियन महिला सोनिया गांधी और युवराज राहुल गांधी के आशीर्वाद से शाहरुख़ को बिना किसी सुरक्षा के फ़िल्म रिलीज़ करने दीजिए। फ़िल्म को देशभर में कही भी थियेटर में चलने दीजिए। शिवसेना इसका विरोध नहीं करेगी ।
पिछले दिनों शिवसेना ने धमकी दी थी कि वो शाहरुख़ को मुंबई में फ़िल्म रिलीज़ नहीं करने देगी।
पार्टी कार्यकर्ताओं ने शाहरुख़ के पोस्टर फाड़े थे, जिसके बाद थियेटर से फ़िल्म के पोस्टर हटा दिए गए थे ।
पिछले दिनों आईपीएल के तीसरे संस्करण में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को शामिल न किए जाने के मुद्दे पर शाहरुख़ ने कहा था कि अगर खिलाड़ी बोली प्रक्रिया का हिस्सा थे, तो उन्हें टीम में शामिल करना चाहिए था ।
इसके बाद से ही शिवसेना ने शाहरुख़ के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला हुआ है ।
अप्रत्यक्ष धूम्रपान से बचाव जरुरी. : विश्व स्वास्थ संगठन
विश्व स्वास्थ संगठन के अधिकारी अला अलवान ने कहा है की तम्बाकू के धुएं से बचने के लिए दुनिया भर के देशों को सख्त कदम उठाने होंगे. उन्होंने कहा की धूम्रपान के कारण कई लोगों की सेहत को हानि पहुंच रही है और जल्द से जल्द उपाय योजना बनाना अत्यावश्यक है. संयुक्त राष्ट्र के इस संगठन के अनुसार अप्रत्यक्ष धूम्रपान से कई जानलेवा बीमारियां होती हैं और सालाना १० अरब डौलर का नुकसान भी होता है.
दुनिया के १७ देशों में सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान करने की मनाही है, २००८ में कोलंबिया, जिबुटी, ग्वाटेमाला, पनामा, तुर्की, और ज़ाम्बिया ने भी इस कानून को लागू किया था. लेकिन संगठन के अनुसार और देशों को इस कानून को अपनाना होगा. फिलहाल सबसे ज्यादा आबादी वाले सिर्फ २२ शहरों में सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान की मनाही है. दुनिया में ज्यादा आबादी वाले १०० शहर है जिनमें कई भारतीय शहर भी शामिल है.
किंग खान ने कहा ठाकरे के यहाँ नहीं जाऊंगा .
दोहे और उक्तियाँ !!
शुक्रवार, ५ फरवरी २०१०
अमर की अमरवाणी, अपना राजनितिक आशियाना बनायेंगे.
नई पार्टी का नाम तय करने पर चर्चा चल रही है जो जल्दी ही पूरी हो जाएगी. अमर सिंह उन छोटी राजनीतिक पार्टियों से बात कर रहे हैं जिनका पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुछ आधार है. उनके भाई का दावा है कि गठबंधन बनाने के लिए राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष अजित सिंह से भी बात होगी.
पकिस्तान में मौत के धमाके, २३ मरे सैकड़ो घायल .
आम के हुए राहुल, राहुल के हुए आम. मुंबई लोकल से किया सफ़र .
शिवसेना ने हाल में राहुल को महाराष्ट्र से दूर रहने की चेतावनी दी थी। वह सुबह करीब 11.20 बजे सांताक्रूज ओल्ड हवाई अड्डा पहुंचे और वहां भाईदास हॉल रवाना हो गए। यहां उनका 1100 कॉलेज छात्रों और युवकों को संबोधित करने का कार्यक्रम था।
उनकी अगवानी मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण, मुंबई प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ता, स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधि और अन्य प्रमुख व्यक्तियों ने उनकी अगवानी की। शिवसेना ने अपने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया था कि वे राहुल को काले झंडे दिखाएं, क्योंकि उन्होंने मराठी लोगों और महाराष्ट्र का अपमान किया है। सुरक्षाकर्मियों ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी व्यक्ति झंडा उठाए दिखाई न दे।
मुंबई पुलिस के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड, त्वरित कार्य बल तथा अन्य सुरक्षा बलों के कमांडो तैनात किए गए। दोपहर को राहुल घाटकोपर जाएंगे जहां रमाबाई अंबेडकर नगर झुग्गी बस्ती है। वह वहां भारत रत्न बाबासाहेब अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करेंगे।
प्रवक्ता ने बताया कि दोनों बैठके राहुल की समाज के विभिन्न तबकों के युवाओं और छात्रों से मिलने की इच्छा को ध्यान में रखकर आयोजित की गई हैं। भाईदास हॉल से चंद किलोमीटर दूर शिवसेना पार्षद राजुल पटेल के नेतृत्व में महिला कार्यकर्ताओं के समूह ने सुरक्षा बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की लेकिन उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए अंधेरी, विले पार्ले, जोगेश्वरी और घाटकोपर में बड़े समूहों में शिव सैनिक जमा हुए। मुंबई में चार घंटे बिताने के बाद राहुल का पुड्डचेरी जाने का कार्यक्रम है।
दोहे और उक्तियाँ !!
गुरुवार, ४ फरवरी २०१०
आहत शाहरुख़ ख़ान !
शिवसेना की ओर से चल रही बयानबाज़ी से आहत चर्चित अभिनेता शाहरुख़ ख़ान ने कहा है कि वे समझ नहीं पा रहे हैं कि मुद्दा क्या है लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे धमकियों के आगे झुकने वाले नहीं हैं ।लंदन में पत्रकारों से बातचीत में शाहरुख़ ने अपनी नई फ़िल्म माई नेम इज ख़ान से जुड़े लोगों से यह कहते हुए माफ़ी मांगी कि उनके रुख़ से फ़िल्म पर असर पड़ सकता है ।
पिछले दिनों इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को न शामिल करने के मुद्दे पर शाहरुख़ ने कहा था कि ऐसा नहीं होना चाहिए था ।
शाहरुख़ के इस बयान से नाराज़ शिवसेना ने उनकी आने वाली फ़िल्म माई नेम इज ख़ान के ख़िलाफ़ अभियान चलाया है और शाहरुख़ से माफ़ी मांगने को कहा है । पत्रकारों से बातचीत में शाहरुख़ ने कहा, "मैं नहीं जानता कि मुद्दा क्या है। मैं ये भी नहीं समझ पा रहा हूँ कि मुझसे क्या वापस लेने को कहा जा रहा है। क्या मैं इस तथ्य से पीछे हट जाऊँ कि मैं भारतीय हूँ और मैं ये नहीं चाहता कि कोई मेरे देश में आए । "
शाहरुख़ ने कहा कि उन्होंने तो सिर्फ़ इतना ही कहा है कि लोग उनके देश में आकर क्रिकेट के इस बड़े मुक़ाबले में हिस्सा लें । उन्होंने कहा कि अब उन्हें कुछ भी कहने में मुश्किल हो रही है क्योंकि लोगों का दाँव बहुत ज़्यादा है ।
शाहरुख़ अपनी फ़िल्म के प्रोमोशन के लिए बुधवार को लंदन में थे। उनके साथ निर्माता करण जौहर और अभिनेत्री काजोल भी मौजूद थीं ।उन्होंने फ़िल्म से जुड़े लोगों से इस सारे विवाद के लिए माफ़ी भी मांगी.
शाहरुख़ ने कहा, "मैं करण जौहर, काजोल और फ़िल्म से जुड़े लोगों से माफ़ी मांगता हूँ। क्योंकि मेरे रुख़ से फ़िल्म पर असर पड़ सकता है । "
आरोप है कि शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने शाहरुख़ ख़ान की आने वाली इस फ़िल्म के पोस्टर फाड़ डाले हैं और मल्टीप्लेक्स वालों को चेतावनी दी है । माई नेम इज ख़ान का निर्देशन करण जौहर ने किया है। बड़े पर्दे पर शाहरुख़ और काजोल की जोड़ी आठ साल बाद दर्शकों के सामने आ रही है ।ये फ़िल्म दुनियाभर में 12 फरवरी को रिलीज़ हो रही है ।
पाकिस्तान के साथ बातचीत की पेशकश !
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत ने पाकिस्तान के साथ विदेश सचिव स्तर की बातचीत की पेशकश की है। ये भी कहा गया है कि दोनों देशों के बीच उच्च स्तर पर संपर्क की बहाली के लिए कुछ सुझाव पाकिस्तान को मिले हैं । ग़ौरतलब है कि दोनों देशों के बीच वर्ष 2004 में शुरु हुई समग्र वार्ता का सिलसिला नवंबर 2008 में हुए मुंबई हमलों के बाद से रुका हुआ है ।
भारत बार-बार कहता रहा है कि पाकिस्तान अपनी धरती पर मौजूद उन कथित चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करे जिनपर मुंबई हमलों से संबंधित होने का आरोप है। उधर पाकिस्तान कहता रहा है कि वह हर संभव कार्रवाई कर रहा है और यदि भारत पुख़्ता सबूत सौंपे तो कार्रवाई बेहतर ढंग से हो सकती है ।
महत्वपूर्ण है कि भारत ने हाल में कहा था कि भारतीय गृहमंत्री पी चिदंबरम फ़रवरी के अंत में पाकिस्तान जाएंगे जहाँ वे रावलपिंडी में एक क्षेत्रीय बैठक में हिस्सा लेंगे ।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रावलय के प्रवक्ता अब्दुल बासित ने कहा, "भारत की ओर से दोनों पक्षों के बीच संपर्क की बहाली के कुछ सुझाव पाकिस्तान की सरकार को मिले हैं। पाकिस्तान इनका जायज़ा ले रहा है....फ़िलहाल इस बारे में तफ़सील के बताना मुनासिब नहीं होगा । "
उधर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने एक पाकिस्तान टीवी चैनल से बातचीत में भारत के क़दम का स्वागत किया है और कहा है कि इस बारे में विस्तृत एजेंडा पर जानकारी जुटाई जा रही है ।
शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा, "हमने दिल्ली में अपने उच्चायुक्त को हिदायत दी है कि वे भारतीय विदेश सचिव से मुलाकात करें और एजेंडे के बारे में जानकारी प्राप्त करें । "
राहुल कल मुंबई में.
राहुल की ये यात्रा नि:संदेह राष्ट्रीय एका का सन्देश लेकर आएगा की सम्पूर्ण राष्ट्र हमारा है और हम सभी इस राष्ट्र के हैं.
मोहम्मद मीर के पद्म पुरस्कार पर विवाद !!
भारत प्रशासित कश्मीर के ग़ुलाम मोहम्मद मीर को पद्म पुरस्कार दिए जाने को लेकर ख़ासा विवाद खड़ा हो गया है। मानवाधिकार कार्यकर्ता इसे राज्य का अपमान बता रहे हैं । मोहम्मद मीर के बारे में बताया जाता है कि उन्होंने पृथकतावादी चरमपंथियों के विरुद्ध भारतीय सुरक्षा बलों की बहुत सहायता की है। लेकिन आम कश्मीरी लोगों के बीच में उनकी छवि केवल इतनी भर ही नहीं है ।
कई आम लोगों का मानना है कि उनका कुछ हत्याओं, पैसा वसूली और बलात्कार जैसे मामलों में भी हाथ है ।
जाने माने मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज़ कहते हैं कि गुलाम मोहम्मद मीर एक क़ातिल हैं और कातिल को पद्म पुरस्कार दिया जा रहा है। इससे भारत सरकार यह संदेश देना चाहती है कि उसे राज्य के लोगों की परवाह नहीं, मोहम्मद मीर सरकार के लिए एक अहम चीज़ हैं और वो उन्हें बचा रही है ।
घाटी में सुरक्षा बलों की मदद करने वाले अधिकतर काउंटर इंसर्जेंट ऐसे हैं जो पहले चरमपंथी थे लेकिन बाद में सुरक्षाबलों के सामने समर्पण करके उन्होंने चरमपंथ के ख़िलाफ़ सरकार की मदद करने का काम शुरू कर दिया ।
पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा के बाद विवादों से घिरे मोहम्मद मीर का कहना तो यह है कि वो कभी भी चरमपंथी थे ही नहीं ।
उन्होंने कहा, "मैं कभी आतंकवादी नहीं था। मैं तो एक आम नागरिक था। मेरा कसूर इतना ही है कि मैंने भारत का साथ दिया है। अगर कोई साबित कर दे कि मैं आतंकवादी था तो मैं फाँसी पर चढ़ने को तैयार हूँ ।
हालांकि राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस मामले से यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया है कि उन्होंने मीर को पद्म पुरस्कार दिए जाने की सिफ़ारिश नहीं की लेकिन मीर का कहना है कि इसके लिए उमर अब्दुल्ला के पिता फ़ारूक अब्दुल्ला ने केंद्र से सिफ़ारिश की थी ।
इस मुद्दे पर राज्य की विपक्षी पार्टी पीडीपी राज्य सरकार को आड़े हाथों ले रही है लेकिन मीर ने इस बाबत बताया है कि पीडीपी से उनके अच्छे ताल्लुक रहे हैं, पीडीपी के टिकट पर उनकी बेटी चुनाव भी लड़ चुकी है। ऐसे में पीडीपी का विरोध बेमानी हो जाता है ।
बुधवार, ३ फरवरी २०१०
मंहगाई का पर सरकारी कहर जारी, बढ़ेंगे रसोई गैस और पेट्रोल की कीमतें.
समिति की सिफारिशों को यदि स्वीकार कर लिया जाता है तो पेट्रोल के दाम में 4.72 रुपए और डीजल में 2.35 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि हो जाएगी। घरेलू एलपीजी सिलेंडर 100 रुपए बढ़कर करीब 400 रुपए और मिट्टी तेल नौ रुपए से बढ़कर 15 रुपए लीटर पर पहुंच जाएगा। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री मुरली देवडा़ को बुधवार को यहां यह रिपोर्ट सौंपी गई। रिपोर्ट में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की सभी तेल कंपनियों को खुले बाजार की नीति के अनुरूप समान शर्तों वाले परिवेश में पेट्रोलियम पदार्थों की बिक्री करने का माहौल उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
देवडा़ ने कहा कि रिपोर्ट पर पहले मंत्रालय में विचार किया जाएगा और उसके बाद इसे अगले एक पखवाडे़ में मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि आम बजट में भी रिपोर्ट की सिफारिशों को शामिल किया जा सकता है। देवडा ने स्वीकार किया कि समिति की रिपोर्ट को अमल में लाना कठिन कार्य है लेकिन सरकार के सामने दूसरा कोई विकल्प नहीं है।
डा. पारिख ने रिपोर्ट सौंपने के बाद संवाददाताओं के साथ बातचीत में कहा कि उन्होंने पेट्रोलियम की व्यावहारिक और सतत मूल्य नीति पर विचार किया है। रिपोर्ट तैयार करते समय जहां एक तरफ सरकारी खजाने पर बढ़ते सब्सिडी बोझ पर ध्यान दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ पेट्रोलियम के दाम बढ़ने से गरीब पर पड़ने वाले भार पर भी गौर किया गया है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में आते उतार चढा़व से घरेलू अर्थव्यवस्था को सुरक्षा कवच दिया जाना इस नीति का वृहत उद्देश्य है।
पेट्रोल के दाम सरकारी शिकंजे से मुक्त करने की सिफारिश करते समय समिति ने दुपहिया वाहन चलाने वालों का भी ध्यान रखा है और समिति मानती है कि पेट्रोल के दाम को खुला छोड़ दिया जाना चाहिए। रिफाइनरी गेट और खुदरा स्तर पर इनके दाम नियंत्रण मुक्त कर दिए जाने चाहिए। डीजल के मामले में भी समिति का यही मानना है कि दाम नहीं बढा़ए जाने से सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ता जाएगा। सरकारी खजाने पर यदि बोझ बढ़ता है तो उसकी भरपाई कहीं न कहीं से करनी होगी जिसका असर अंतत किसी न किसी रूप में जनता पर ही पडे़गा। डा. पारिख ने कहा कि कृषि क्षेत्र में डीजल का उपयोग होता है। दाम बढ़ने की सूरत में किसानों पर बोझ बढे़गा लेकिन इसकी भरपाई फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य बढा़कर की जा सकती है। उन्होंने कहा कि कृषि लागत एवं मूल्य आयोग एमएसपी तय करते समय 15 प्रतिशत हिस्सा ईंधन लागत का शामिल करता है।
समिति ने राशन में बिकने वाले मिट्टी तेल के दाम फिलहाल छह रुपए लीटर बढा़ने की सिफारिश की है। समिति का मानना है कि लंबे समय से किरासिन के दाम नहीं बढा़ए गए हैं जबकि इस दौरान शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति आय में काफी वृद्धि हुई है। डा. पारिख ने कहा कि डीजल और मिट्टी तेल के दाम में भारी फासला होने की वजह से मिलावट को भी बढा़वा मिलता है। उन्होंने कहा कि सस्ता मिट्टी तेल केवल गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली जनता को ही मिलना चाहिए। इसके लिए स्मार्ट कार्ड अथवा राष्ट्रीय पहचान पत्र को पहचान बनाया जाना चाहिए।
अमर का कांग्रेस प्रेम.
कांग्रेस के संदर्भ में अमर सिंह ने मेलमिलाप वाला रूख अपनाने को कहा। सिंह ने कहा कि हालांकि वहां पर भी परिवार को अधिक महत्व दिया गया है, मगर वह सपा सहित उन पार्टियों से अलग है, जो राजनीतिक परिवार द्वारा चलाई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और बसपा में अंतर यह है कि कांग्रेस के राहुल गांधी पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र की बात करते हैं। पार्टी ने चुनाव कराया और स्थिति से निपटने के लिए व्यवस्था है तथा एक कोर समिति है जो निर्णय लेती है।
सिंह ने एक साक्षात्कार में बताया कि यह बात नहीं है कि पार्टी अध्यक्ष कुछ कहे और अगले ही दिन उसके ठीक विपरीत कहे। इससे पार्टी की छवि खराब होती है, क्योंकि इससे पार्टी की राजनीतिक विश्वनीयता प्रभावित होती है। यह पूछे जाने पर कि उन्होंने कांग्रेस में शामिल होने के लिए कोशिश की है, 54 वर्षीय नेता ने स्पष्ट करते हुए कहा कि वह कोई बच्चे नहीं हैं जो नर्सरी में प्रवेश चाहते हैं।
पूर्व कांग्रेस सदस्य सिंह ने कहा कि उनको इतना पता है कि उनका डीएनए कांग्रेस विरोधी नहीं है। उनके कई व्यक्तिगत मित्र कांग्रेस में हैं और संप्रग (एक) और संप्रग (दो) के गठन में भूमिका निभाई थी।
अफगान में भारत की भूमिका पाक के खिलाफ : चौधरी अहमद मुख्तियार !!
पाकिस्तान ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में भारत का बढ़ता हुआ प्रभाव उसके लिए बहुत ही चिंता का विषय है । रक्षा मंत्री चौधरी अहमद मुख़्तियार ने ब्रितानी नौसेना के प्रमुख एडमिरल सर मार्क स्टेनहोप से इस्लामाबाद में मुलाक़ात के बाद बताया, “अफग़ानिस्तान में भारत की कोई भी भूमिका पाकिस्तान के हितों के ख़िलाफ़ है और हमें वहाँ भारत के बढ़ते हुए प्रभाव से चिंता है । "
ऐसी ही चिंता सेना के प्रमुख जनरल अशफाक़ परवेज़ कियानी सेना मुख्यालय में सोमवार को पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान व्यक्त कर चुके हैं ।
सेना प्रमुख ने अमरीका और नैटो पर बल दिया कि वह अफ़ग़ानिस्तान को लेकर अपनी नीति स्पष्ट करे और पाकिस्तान के सामरिक हितों और चिंताओं को भी ध्यान में रखें ।
उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान में भारत की बढ़ती हुई मौजूदगी पर चिंता व्यक्त की और अफ़ग़ानिस्तान की सेना को प्रशिक्षण देने का भी प्रस्ताव रखा।
जनरल अशफाक़ कियानी ने अफग़ानिस्तान की सेना को प्रशिक्षण देने की बात ऐसे समय में कही जब भारत भी ऐसी इच्छा पहले ही कर चुका है ।
उन्होंने पत्रकारों को बताया, “पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान में गहरी रूचि ज़रुर रखता है लेकिन उस पर अपना नियंत्रण नहीं चाहता । "
जानकारों का कहना है कि जनरल कियानी का पत्रकारों से बातचीत करने का उद्देश्य अफ़ग़ानिस्तान को लेकर अमरीका की नीति और ख़ासकर भारत के बढ़ते हुए प्रभाव पर अपना पक्ष रखना है ।









